पेयजल
जल जीवन मिशन
ग्रामीण पाइप पेयजल आपूर्ति, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में पुनर्गठित किया गया; घोषित लक्ष्य दिसंबर 2028 तक सभी ग्रामीण परिवारों तक पहुँच है।
यह पद, जून 2024 से
यह पद वास्तव में किन चीज़ों से मिलकर बना है: दो विभाग, एक कैबिनेट मंत्री और दो राज्य मंत्री, तकनीकी संस्थानों का एक समूह, और राज्यों के साथ ज़िम्मेदारियों का वह संवैधानिक बँटवारा जो मंत्रालय के हर कार्य की सीमा तय करता है।
मंत्री के काम को लेकर बहुत-सा भ्रम दो अलग-अलग चीज़ों को एक मान लेने से पैदा होता है। केंद्रीय मंत्रालय एक स्थायी संस्था है: सचिव, इंजीनियर, वैज्ञानिक, मिशन निदेशालय और सांविधिक बोर्ड, जिनका अधिकांश काम इस बात से अलग चलता रहता है कि मंत्रालय का प्रभार किसके पास है। मंत्री एक राजनीतिक पदधारक होता है, जिसे एक अवधि के लिए उसके शीर्ष पर रखा जाता है और जो मंत्रालय के कामकाज के लिए संसद के प्रति उत्तरदायी होता है।
यह वेबसाइट इन दोनों को अलग रखती है। जहाँ किसी कार्यक्रम का आँकड़ा दिया गया है, वहाँ उसे रिपोर्ट करने वाले विभाग के नाम और तिथि के साथ दिया गया है। जहाँ मंत्री ने स्वयं किसी बैठक की अध्यक्षता की, कोई कार्यक्रम शुरू किया या सदन में किसी प्रश्न का उत्तर दिया, उसे उनके अपने कार्य के रूप में, संबंधित विज्ञप्ति के साथ दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में चालू किया गया कोई सीवेज शोधन संयंत्र किसी केंद्रीय मंत्री की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, और यहाँ उसे ऐसा बताया भी नहीं गया है।
नीतिगत दिशा तय करना और उसका बचाव करना। मंत्रालय के लिए संसद के दोनों सदनों के प्रति उत्तरदायी होना। राजनीतिक स्तर के लिए आरक्षित निर्णय लेना। राज्यों के साथ राष्ट्रीय समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करना। कार्यक्रमों और दिशानिर्देशों का शुभारंभ और विमोचन करना। मंत्रालय की अनुदान माँगों और उसके विधेयकों को संसद में आगे बढ़ाना।
योजनाओं की रूपरेखा बनाना और उनका मूल्यांकन करना। जल-विज्ञान और भूजल संबंधी वैज्ञानिक कार्य करना। तकनीकी मानदंड और परामर्श जारी करना। राष्ट्रीय निगरानी प्रणालियाँ चलाना। धनराशि जारी करना और उसका मिलान करना। नदी प्राधिकरणों, आयोगों और अनुसंधान केंद्रों का संचालन करना।
जल और स्वच्छता राज्य के विषय हैं। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी या ग्रामीण जलापूर्ति विभागों और पंचायती राज संस्थाओं के माध्यम से योजनाओं का नियोजन करते हैं, निविदाएँ जारी करते हैं, निर्माण करते हैं, उनके स्वामी होते हैं और उनका संचालन व रखरखाव करते हैं।
संचालन, रखरखाव, शुल्क वसूली और निगरानी की स्थानीय ज़िम्मेदारी ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों की होती है — यही वह स्तर है जहाँ कोई योजना या तो चलती रहती है या चुपचाप बंद हो जाती है।
जल शक्ति मंत्रालय का गठन मई 2019 में दो मंत्रालयों को मिलाकर किया गया था। इसके प्रत्येक विभाग का अपना सचिव और अपनी अनुदान माँग है; दोनों एक ही कैबिनेट मंत्री के अधीन काम करते हैं।
मंत्रालय का संसाधन-पक्ष। इसके दायरे में जल संसाधनों का विकास और प्रबंधन, सिंचाई, अंतर-राज्यीय नदियाँ और नदी घाटी विकास, भूजल विज्ञान और विनियमन, बाढ़ प्रबंधन, तथा गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण और पुनरुद्धार आते हैं।
मंत्रालय का सेवा-पक्ष। इसके दायरे में ग्रामीण पेयजल आपूर्ति और ग्रामीण स्वच्छता आती है — यानी वे दो राष्ट्रीय मिशन जो सीधे घर-घर तक पहुँचते हैं, और उन्हें सहारा देने वाले मानदंड, निगरानी प्रणालियाँ और क्षमता-निर्माण।
ये वे प्रमुख कार्यक्रम और कार्य हैं जिनके लिए जल शक्ति मंत्री संसद के प्रति उत्तरदायी हैं। प्रत्येक के साथ इस वेबसाइट के उस संदर्भ पृष्ठ का लिंक है, जहाँ उस कार्यक्रम का स्रोतों सहित विस्तृत विवरण दिया गया है।
पेयजल
ग्रामीण पाइप पेयजल आपूर्ति, जिसे 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के बाद जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में पुनर्गठित किया गया; घोषित लक्ष्य दिसंबर 2028 तक सभी ग्रामीण परिवारों तक पहुँच है।
स्वच्छता
ग्रामीण स्वच्छता, जिसका दूसरा चरण 2020–21 से 2026–27 तक चल रहा है; यह ओडीएफ प्लस मानक पर आधारित है, यानी खुले में शौच मुक्त स्थिति को बनाए रखना और साथ में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन।
नदियाँ
गंगा बेसिन में प्रदूषण नियंत्रण, सीवरेज अवसंरचना, जैव विविधता और आजीविका से जुड़ा कार्यक्रम, जिसे 2014 से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
भूजल
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा वार्षिक गतिशील भूजल संसाधन आकलन, राष्ट्रीय जलभृत मानचित्रण कार्यक्रम (NAQUIM) के तहत जलभृत मानचित्रण, केंद्रीय भूमि जल प्राधिकरण के माध्यम से विनियमन, और अटल भूजल योजना के तहत समुदाय-आधारित प्रबंधन।
संरक्षण
वार्षिक राष्ट्रीय जल संरक्षण अभियान, जिसे 1 जून 2026 को जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन के रूप में पुनर्गठित किया गया; इसका लक्ष्य जल-संकटग्रस्त चिह्नित ब्लॉकों में वर्षा जल संचयन और पुनर्भरण है।
संस्थाएँ
केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय भूमि जल बोर्ड, राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, अनुसंधान केंद्र और अंतर-राज्यीय नदियों का संचालन करने वाले सांविधिक निकाय — ये सभी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं।
इस पद पर सबसे महत्वपूर्ण बाध्यता संवैधानिक है। जल, जिसमें जलापूर्ति, सिंचाई, जल निकासी और तटबंध शामिल हैं, राज्य सूची की प्रविष्टि 17 के तहत राज्य का विषय है। संघ का अधिकार-क्षेत्र संघ सूची की प्रविष्टि 56 के तहत अंतर-राज्यीय नदियों और नदी घाटियों के विनियमन और विकास तक, तथा वित्तपोषण और समन्वय की उसकी सामान्य शक्तियों तक सीमित है।
इसका व्यावहारिक परिणाम इस वेबसाइट पर दिए गए हर कार्यक्रम में दिखाई देता है। केंद्र मिशनों की रूपरेखा बनाता है, तकनीकी और गुणवत्ता मानदंड तय करता है, केंद्रीय सहायता देता है और राष्ट्रीय निगरानी चलाता है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश निर्णय लेते हैं, निर्माण करते हैं, स्वामित्व रखते हैं और संचालन करते हैं। इसलिए कोई भी राष्ट्रीय आँकड़ा छत्तीस अलग-अलग प्रशासनों द्वारा भेजे गए विवरणों का योग होता है, और किसी भी लक्ष्य तक पहुँचने की गति काफ़ी हद तक उन्हीं पर निर्भर करती है।
मंत्री ने पुनर्गठित पेयजल मिशन के संदर्भ में स्वयं यह बात कही है। 13 मार्च 2026 को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, ग्रामीण जलापूर्ति और पंचायती राज का प्रभार संभालने वाले राज्यों के मंत्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने ज़ोर दिया कि जल राज्य का विषय होने के कारण मिशन की सफलता ग्रामीण परिवारों तक भरोसेमंद नल जलापूर्ति पहुँचाने में राज्य सरकारों की जवाबदेही पर निर्भर करती है, और उन्होंने योजनाओं को समय पर पूरा करने तथा ज़मीनी स्तर पर निगरानी मज़बूत करने का आग्रह किया।
अंतिम अद्यतन: सितंबर 2026