हर घर जल · अगस्त 2019 से
जल जीवन
मिशन
हर ग्रामीण घर में एक कार्यात्मक नल कनेक्शन — और मार्च 2026 से एक पुनर्गठित मिशन, जो किसी गांव को तभी कवर हुआ मानता है जब वहां पानी लगातार पहुंचता रहे।
- शुरुआत
- अगस्त 2019
- पुनर्गठन
- जल जीवन मिशन 2.0, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को मंज़ूरी दी
- कुल परिव्यय
- ₹8.69 लाख करोड़, जिसमें केंद्रीय सहायता ₹3.59 लाख करोड़ है
- लक्ष्य
- दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवार
मिशन कहां तक पहुंचा है
जब तक किसी अन्य स्रोत का नाम न दिया गया हो, इस पृष्ठ के सभी आंकड़े सरकार द्वारा रिपोर्ट किए गए हैं। ये राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा केंद्र को भेजे गए विवरण हैं, जिन्हें 31 मार्च 2026 को पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की रिलीज़ आईडी 2247224 में प्रकाशित किया गया।
शुरुआत में नल कनेक्शन वाले परिवार
16.7 प्रतिशत, अगस्त 2019
तब से रिपोर्ट किए गए अतिरिक्त कनेक्शन
31 मार्च 2026 तक संचयी
नल जल आपूर्ति वाले रिपोर्ट किए गए परिवार
कुल ग्रामीण परिवारों का लगभग 81.8 प्रतिशत
मिशन के दायरे में आने वाले ग्रामीण परिवार
यहां दिए गए हर प्रतिशत का आधार
ग्रामीण परिवारों का वह हिस्सा, जिनके पास घरेलू नल जल कनेक्शन होने की रिपोर्ट है।
पृष्ठभूमि
भारत में 1970 के दशक से ग्रामीण पेयजल राष्ट्रीय कार्यक्रमों का विषय रहा है। एक के बाद एक आई योजनाओं का मुख्य उद्देश्य गांव की पहुंच में एक सार्वजनिक स्रोत उपलब्ध कराना था — हैंडपंप, सार्वजनिक नल या सामुदायिक कुआं। ये कार्यक्रम कवरेज को स्रोत के होने से मापते थे, इस बात से नहीं कि कोई परिवार अपने घर में नल खोल सकता है या नहीं।
अगस्त 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन ने माप की इकाई को गांव से बदलकर परिवार कर दिया। इसका घोषित उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को ऐसा कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन देना है, जिससे निर्धारित गुणवत्ता का पर्याप्त पानी नियमित और दीर्घकालिक आधार पर मिले। इस परिभाषा में सबसे वज़नदार शब्द है — कार्यात्मक।
कार्यक्रम को शुरू से ही इस तरह बनाया गया कि स्रोत की स्थिरता उसका अनिवार्य हिस्सा हो — पुनर्भरण, ग्रे वॉटर प्रबंधन के ज़रिए पुनः उपयोग, जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन। इसके पीछे तर्क यह था कि सूखते जलभृत से पानी खींचने वाली पाइपलाइन एक स्थायी समस्या का अस्थायी समाधान भर है।
03मिशन की संरचना
मिशन चार-स्तरीय संरचना के माध्यम से काम करता है। हर चरण में वास्तविक ज़िम्मेदारी किसकी है, यह समझने के लिए यह संरचना महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत। नीति और तकनीकी मानदंड तय करता है, परामर्श जारी करता है, राष्ट्रीय निगरानी प्रणालियां चलाता है, राज्यों की योजनाओं का आकलन करता है और केंद्रीय सहायता जारी करता है।
राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन
राज्य के लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी या ग्रामीण जल आपूर्ति विभाग के माध्यम से योजनाओं की योजना, निविदा, डिज़ाइन और क्रियान्वयन करता है। परिसंपत्तियों का स्वामी है और आपूर्ति के लिए जवाबदेह है।
ज़िला जल एवं स्वच्छता मिशन
ज़िला कार्य योजना तैयार करता है, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय करता है, और ज़िले के सभी प्रखंडों में क्रियान्वयन व गुणवत्ता की निगरानी करता है।
ग्राम पंचायत और उसकी ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति
गांव के भीतर के नेटवर्क की योजना बनाती है, पूंजीगत लागत में योगदान देती है, और योजना सौंपे जाने के बाद संचालन, रखरखाव, शुल्क वसूली और स्थानीय निगरानी की ज़िम्मेदारी लेती है।
हर घर जल
हर घर जल — यानी हर घर में पानी — मिशन से जुड़ी प्रमाणन की अवधारणा है। किसी प्रशासनिक इकाई को हर घर जल तब घोषित किया जाता है जब उसके हर परिवार को नल जल आपूर्ति उपलब्ध करा दी गई हो। 2026 तक यह घोषणा मुख्य रूप से कनेक्शन उपलब्ध कराने पर आधारित थी।
पुनर्गठित मिशन में यह कसौटी अधिक कठोर है। किसी ग्राम पंचायत को हर घर जल तभी घोषित किया जाएगा जब यह पुष्टि हो जाए कि राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार ने गांव के भीतर संचालन और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था स्थापित कर दी है। शब्दों में यह बदलाव छोटा है, पर प्रभाव में बड़ा: प्रमाणपत्र अब निर्माण के क्षण से हटकर उस क्षण से जुड़ जाता है जब गांव यथार्थ रूप से प्रणाली को चालू रख सकने की स्थिति में हो।
05बुनियादी ढांचा और स्रोत की स्थिरता
ग्रामीण पाइप जल योजना में एक स्रोत होता है — बोरवेल, किसी सतही जल निकाय पर इनटेक, या किसी बड़ी प्रणाली से आने वाली बल्क ट्रांसमिशन लाइन — और उसके साथ शोधन, भंडारण, गांव के भीतर वितरण नेटवर्क तथा हर घर तक कनेक्शन। योजनाओं को केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (सीपीएचईईओ) द्वारा जारी डिज़ाइन मानदंडों का पालन करना होता है। पुनर्गठित मिशन में निधि जारी होने से पहले इस अनुपालन को राज्य सरकार द्वारा प्रमाणित किया जाना और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन द्वारा तकनीकी परामर्श जारी किया जाना आवश्यक है।
स्रोत की स्थिरता को अलग गतिविधि नहीं, बल्कि योजना का ही हिस्सा माना जाता है। पुनर्भरण संरचनाएं, ग्रे वॉटर प्रबंधन और वर्षा जल संचयन गांव की योजना में शामिल किए जाते हैं, और संरक्षण प्रयासों के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का चयन केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के वार्षिक प्रखंड-स्तरीय आकलन के आधार पर होता है। संरक्षण कार्यक्रम →
06जल गुणवत्ता
मात्रा और गुणवत्ता दो अलग समस्याएं हैं, और भारत के कुछ हिस्सों में गुणवत्ता की समस्या अधिक कठिन है: फ़्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन, खारापन और जीवाणु संदूषण — हर एक के लिए अलग शोधन और अलग निगरानी की ज़रूरत होती है।
मिशन का उत्तर दो स्तरों पर काम करता है। प्रयोगशाला परीक्षण राज्य, ज़िला और प्रखंड स्तर की जल परीक्षण प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के माध्यम से होता है। साथ ही, फ़ील्ड टेस्टिंग किट के ज़रिए गांव स्तर पर निगरानी की जाती है, जिसके लिए गांव के लोगों को — व्यवहार में अक्सर महिलाओं को — नियमित परीक्षण करने और परिणाम राष्ट्रीय प्रणाली में दर्ज करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। उद्देश्य यह है कि संदूषण का पता वहीं चले जहां पानी पिया जाता है, न कि केवल वहां जहां औपचारिक रूप से नमूना लिया जाता है।
सामुदायिक भागीदारी
मिशन की रूपरेखा इस मान्यता पर आधारित है कि जिस गांव की किसी योजना में कोई हिस्सेदारी नहीं होगी, वह उसका रखरखाव नहीं करेगा। इस मान्यता की संस्थागत अभिव्यक्ति ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति है — ग्राम पंचायत की एक उप-समिति — जो योजना बनाने में, पूंजीगत लागत में समुदाय के अंशदान में, और बाद में संचालन व रखरखाव में भाग लेती है।
पुनर्गठित मिशन के तहत शुरू की गई तीन व्यवस्थाएं इसे और औपचारिक रूप देती हैं:
- जल अर्पण — पूरी हो चुकी योजनाओं को चालू करने और औपचारिक रूप से सौंपने में ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को शामिल किया जाता है, ताकि ज़िम्मेदारी का हस्तांतरण मान लिया गया तथ्य न रहकर एक स्पष्ट घटना हो।
- जल सेवा आकलन — ग्राम पंचायत स्तर का आकलन, जो सेवा आपूर्ति पर नागरिकों की प्रतिक्रिया दर्ज करता है; इसके परिणाम मेरी पंचायत ऐप्लिकेशन के माध्यम से दिखाई देते हैं, जिससे शिकायत निवारण मज़बूत होता है।
- जल उत्सव — रखरखाव और समीक्षा का एक वार्षिक, समुदाय-संचालित अभियान, जो तीन स्तरों पर होता है: राष्ट्रीय स्तर पर जल महोत्सव, राज्य स्तर पर राज्य जल उत्सव या नदी उत्सव, और ग्राम पंचायत स्तर पर लोक जल उत्सव।
परिवारों और समाज पर प्रभाव
घरेलू जल आपूर्ति का सबसे अधिक उल्लेख किया जाने वाला प्रभाव वह समय और श्रम है जो पानी ढोने की ज़रूरत ख़त्म होने पर बचता है। अधिकांश ग्रामीण भारतीय परिवारों में पानी महिलाएं और लड़कियां ढोती हैं, और घर पर नल लगने से वे घंटे उन्हें वापस मिल जाते हैं।
यह वेबसाइट इस प्रभाव के लिए कोई मात्रात्मक आंकड़ा नहीं देती, क्योंकि लिखे जाने के समय इसका कोई सरकारी अनुमान सत्यापित नहीं किया जा सका। अभिलेख के आधार पर जो कहा जा सकता है, वह सीमित है पर फिर भी सार्थक है: जल शक्ति मंत्रालय ने अपने ही कार्यक्रमों में प्रतिभागियों द्वारा इस बदलाव का इन्हीं शब्दों में वर्णन किए जाने को दर्ज किया है। 28 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में मंत्रालय के एक कार्यक्रम में, समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा स्वास्थ्य, गरिमा और जीवन की गुणवत्ता पर हर घर जल के प्रभाव के बारे में बात किए जाने का उल्लेख दर्ज है।
महिलाओं की भागीदारी को केवल एक परिणाम के रूप में नहीं बताया गया है, बल्कि वह कार्यक्रम की संचालन रूपरेखा में ही शामिल है: फ़ील्ड टेस्टिंग किट का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित गांव-स्तरीय जल गुणवत्ता निगरानी कैडर में बड़ी संख्या में गांव की महिलाएं हैं।
यहां क्या दावा नहीं किया गया है
ग्रामीण जल कार्यक्रमों को अक्सर स्वास्थ्य संबंधी परिणामों का श्रेय दिया जाता है — जलजनित रोगों, बाल मृत्यु दर या कुपोषण में कमी। ऐसे प्रभावों को स्थापित करने के लिए महामारी-विज्ञान संबंधी अध्ययन आवश्यक है, और इस वेबसाइट पर कोई सत्यापित सरकारी अनुमान प्रस्तुत नहीं किया गया है। जहां यह पृष्ठ मौन है, वहां कारण यह है कि प्रमाण उपलब्ध नहीं थे, यह नहीं कि प्रश्न महत्वहीन है।
जल जीवन
मिशन 2.0
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को इसे मंज़ूरी दी। इसका घोषित उद्देश्य मिशन को बुनियादी ढांचा-केंद्रित दृष्टिकोण से हटाकर सेवा-आपूर्ति मॉडल की ओर ले जाना है, जिसे पेयजल के अधिक सुदृढ़ प्रशासन का सहारा मिले।
| पहलू | पहले की स्थिति | जेजेएम 2.0 के तहत स्थिति |
|---|---|---|
| कार्यक्रम का आधार | उपलब्ध कराया गया बुनियादी ढांचा | प्रदान की गई सेवा |
| हर घर जल घोषणा | कनेक्शन उपलब्ध कराने पर | केवल तब, जब गांव के भीतर संचालन और रखरखाव की व्यवस्था की पुष्टि हो जाए |
| कुल परिव्यय | — | ₹8.69 लाख करोड़ |
| केंद्रीय सहायता | ₹2.08 लाख करोड़, 2019–20 में स्वीकृत | ₹3.59 लाख करोड़, यानी ₹1.51 लाख करोड़ का अतिरिक्त केंद्रीय हिस्सा |
| राज्य की प्रतिबद्धता | कार्यक्रम के दिशानिर्देश | राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के साथ सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन |
| डिजिटल ढांचा | कार्यक्रम रिपोर्टिंग | सुजलाम भारत — हर गांव के लिए एक विशिष्ट सेवा-क्षेत्र आईडी, स्रोत से नल तक की मैपिंग |
| नागरिक प्रतिक्रिया | — | जल सेवा आकलन, जो मेरी पंचायत ऐप्लिकेशन के माध्यम से दिखाई देता है |
| लक्ष्य | — | दिसंबर 2028 तक सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवार |
स्रोत: पीआईबी रिलीज़ आईडी 2247224, जल शक्ति मंत्रालय, 31 मार्च 2026। डैश (—) का अर्थ है कि रिलीज़ में पहले की स्थिति के लिए तुलनीय आंकड़ा नहीं दिया गया है।
सुजलाम भारत
पुनर्गठित मिशन के तहत स्थापित एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा। हर गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव या सेवा-क्षेत्र पहचानकर्ता मिलता है, जिससे स्रोत से नल तक पेयजल आपूर्ति प्रणाली की संपूर्ण डिजिटल मैपिंग और वास्तविक समय में ट्रैकिंग संभव होती है।
सुजल गांव सेवा-क्षेत्र आईडी बनाई गईं
जल आपूर्ति योजना आईडी जोड़ी गईं
31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार।
निधि और अनुपालन
पुनर्गठित मिशन में केंद्रीय सहायता अनुमोदित कार्य-योजनाओं के बजाय सत्यापित जल आपूर्ति योजनाओं के आधार पर जारी की जाती है। ऐसी पहली राशियां 2025–26 के लिए पांच राज्यों को जारी की गईं।
| राज्य | जारी राशि |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | ₹792.93 करोड़ |
| छत्तीसगढ़ | ₹536.53 करोड़ |
| मध्य प्रदेश | ₹154.02 करोड़ |
| ओडिशा | ₹65.31 करोड़ |
| महाराष्ट्र | ₹12.74 करोड़ |
| कुल | ₹1,561.53 करोड़ |
उस तिथि तक बारह राज्यों ने जेजेएम 2.0 के तहत सुधार-आधारित समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
चार सत्यापन शर्तें
किसी योजना के लिए केंद्रीय सहायता जारी होने से पहले इनमें से हर शर्त पूरी होनी चाहिए।
- राज्य ने जल जीवन मिशन 2.0 के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हों।
- योजना सत्यापन — योजना का सत्यापन सुजलाम भारत की जीआईएस-आधारित परिसंपत्ति रजिस्ट्री से किया जाए।
- तकनीकी अनुपालन — राज्य सरकार सीपीएचईईओ के डिज़ाइन मानदंडों के अनुपालन को प्रमाणित करे, और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन तकनीकी परामर्श जारी करे।
- वित्तीय मिलान — योजना पर हुए व्यय का समुचित मिलान किया गया हो।
स्रोत और संदर्भ
- पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), जल शक्ति मंत्रालय, रिलीज़ आईडी 2247224, 31 मार्च 2026, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत पांच राज्यों को जारी राशि के संबंध में — pib.gov.in
- पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), जल शक्ति मंत्रालय, रिलीज़ आईडी 2219568, 28 जनवरी 2026, मंत्रालय के एक कार्यक्रम में हर घर जल के बारे में समुदाय के अनुभवों को दर्ज करते हुए — pib.gov.in
- जल जीवन मिशन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग — jaljeevanmission.gov.in
- जल जीवन मिशन का राष्ट्रीय डैशबोर्ड, राज्य और ज़िला स्तर की वर्तमान रिपोर्टिंग के लिए — ejalshakti.gov.in
- केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियांत्रिकी संगठन (सीपीएचईईओ), अनुपालन की शर्तों में उल्लिखित डिज़ाइन मानदंडों के लिए
अंतिम अद्यतन: सितंबर 2026 · कार्यक्रम के आंकड़े 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार